Thursday, 8 May 2008

पधारो म्हारे देस!

कहाँ रंगीन मिजाज़ शेन वार्न और कहाँ पारंपरिक राजस्थान. जनता शंका में थी जी... सच्ची!


कुछ शहर के बारे में...
जयपुर के पुराने शहर में घरों का गुलाबी रंग कुछ उड़ा-उड़ा सा है लेकिन अब भी बाकी है. और इसके साथ ही जयपुर ने अपना ठेठ हिन्दुस्तानी अंदाज अब भी बचा कर रखा है. राजनीति में जयपुर भा.ज.पा. का गढ़ माना जाता है. गिरधारीलाल भार्गव यहाँ से सांसद हैं और पुरानी बस्ती में उनके बारे में मशहूर है कि शहर में अपनी पैठ उन्होंने लोगों की अर्थियों को कांधा देकर बनाई है. वो रोज़ सुबह उठकर अखबार पढ़ते हैं. देखते हैं कि श्रद्धांजलि वाले कॉलम में किसकी मौत की सूचना है और फिर पहुँच जाते हैं उनके घर. और इसी प्रतिष्ठा के दम पर वो एक चुनाव में जयपुर के राजा भवानी सिंह को भी हरा चुके हैं. कहते हैं कि यहाँ भा.ज.पा. पत्थर की मूरत को भी चुनाव में खड़ा कर दे तो वो भी जीत जाए. समय-समय पर प्रमोद महाजन, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेताओं के लिए सुरक्षित सीट की तलाश में उन्हें जयपुर से लोकसभा का चुनाव लड़वाने का प्रस्ताव आता रहा है. लोकसभा चुनावों में यहाँ शहर में हर तरफ़ एक ही गीत बजता है... "शावा नी गिरधारीलाल! बल्ले नी गिरधारीलाल!"

जीत के पहले...
16 तारीख को मैं जयपुर पहुँचा. कुछ इस तरह की खबरों ने मेरा स्वागत किया :-



अरे भाई वॉर्न आया है. कोई ना कोई कांड तो करेगा ही! जनता इसी आशंका (पढ़ें उम्मीद) में थी.



सुना है शहर की नर्सों को ख़ास हिदायत दी गई है कि किसी भी अनजान नंबर से SMS आने पर तुरंत IPL के अधिकारियों को सूचित करें. और अगर SMS में गुगली या फ्लिपर जैसे शब्दों का प्रयोग हो तो सीधा ललित मोदी को रिपोर्ट करें.



कुछ लोग यह भी ख़बर लाये थे कि वॉर्न को ख़ास नोकिया 2100 दिया गया है उसके घातक SMS पर नियंत्रण के लिए और उसके फ़ोन को विशेष निगरानी में रखा गया है.



शेन वॉर्न के शहर में आगमन के साथ ही सिगरेट की बिक्री में भारी इजाफा दर्ज किया गया है.



रोहित का कहना था कि हर टीम के पास स्टार है. किसी के साथ शाहरुख़ है तो किसी के साथ प्रिटी जिंटा. इसपर भास्कर का कहना था कि हमारे पास भी तो स्टार है, रोहित राय! और इला अरुण और मिला लो तो फिर और कौन टिकता है हमारे सामने! ऐसा भी सुना गया कि ललित मोदी ने जयपुर में पहले मैच में रोहित राय के पोस्टर बेचे. उसमें रोहित राय शर्ट-लेस अपनी सिक्स पैक ऐब्स दिखा रहा था! क्या बात है, तुम्हारे पास शाहरुख़ तो हमारे पास रोहित राय! वाह क्या मुकाबला है!



पहला मैच देखने आए लोगों को जब पता चला कि समीरा रेड्डी का नाच मैच के पहले ही हो चुका तो उन्होंने अपने पैसे वापिस लौटाने की मांग की. बाकि लोगों ने चीयरलीडर्स से तसल्ली की.

जीत के बाद...
लगातार 5 जीत और IPL टेबल में सबसे ऊपर आने के बाद शेन वॉर्न अब राजस्थान का अपना छोरा है. आने वाले समय में आप कुछ ऐसी चीजों के लिए तैयार रहें...



इस महान वीर कर्म के लिए वॉर्न को तेजाजी,पाबूजी और रामदेव जी की तरह लोकदेवता का दर्जा मिल सकता है. आपकी जानकारी के लिए हम बता दें कि ये सभी लोकदेवता साधारण मनुष्य ही थे जो आमतौर पर गाय या अन्य पशुओं की रक्षा में मारे गए. वैसे ही उसके मन्दिर बन सकते हैं जहाँ परसाद में सिगरेट चढ़ा करेंगी. बोलो शेन वॉर्न महाराज की जय!



अगले RAS के पेपर में राजस्थान के सामान्य ज्ञान में एक सवाल होगा, "राजस्थान के दो वीर योद्धा जिनका एक ही नाम हैं और जिनके पराक्रम के किस्से बच्चे-बच्चे की ज़बान पर हैं." और जवाब होगा, "शेन वॉर्न और शेन वाटसन."


राजकुमार संतोषी अपना सर पीट रहा होगा. कह रहा होगा कि अब अपनी फ़िल्म 'हल्ला बोल' रिलीज़ करता तो राजस्थान रोयल्स के हल्ला बोल में वो भी चल जाती.



इला अरुण को एक संगीत कम्पनी फिर से प्राइवेट अल्बम का कांट्रेक्ट देगी. वीडियो में रखी सावंत को लिया जाएगा (और कौन!) बाद में दोनों में कौन ज्यादा पैसे लेगा इसको लेकर झगड़ा होगा और दोनों एक-दूसरे से ज्यादा बड़ी आईटम होने का दावा करेंगी. राखी हाल ही में आए 'देखता है तू क्या' का हवाला देंगी और इला अरुण 'दिल्ली शहर में म्हारो घाघरो जो घूम्यो' को सबूत के तौर पर पेश करेंगी. फिर इस मुद्दे पर राष्ट्रीय मीडिया द्वारा एक देशव्यापी SMS अभियान चलेगा. नतीजे का हमें भी इंतज़ार है.
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यहाँ सबकुछ मिलेगा सिवाय क्रिकेट के. निवेदन है कि उसकी तलाश ना करें. अगर क्रिकेट देखनी है तो इंग्लैंड- न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज़ (15 मई) और ऑस्ट्रेलिया- वेस्ट इंडीज़ टेस्ट सीरीज़ (22 मई) का इंतज़ार करें. चाहें तो 11 मई को मैनचेस्टर यूनाइटेड को खिताब जीतते देखें जैसी उम्मीद है.

8 comments:

Udan Tashtari said...

आप हिन्दी में लिखते हैं. अच्छा लगता है. मेरी शुभकामनाऐं आपके साथ हैं इस निवेदन के साथ कि नये लोगों को जोड़ें, पुरानों को प्रोत्साहित करें-यही हिन्दी चिट्ठाजगत की सच्ची सेवा है.

एक नया हिन्दी चिट्ठा भी शुरु करवायें तो मुझ पर और अनेकों पर आपका अहसान कहलायेगा.

इन्तजार करता हूँ कि कौन सा शुरु करवाया. उसे एग्रीगेटर पर लाना मेरी जिम्मेदारी मान लें यदि वह सामाजिक एवं एग्रीगेटर के मापदण्ड पर खरा उतरता है.

यह वाली टिप्पणी भी एक अभियान है. इस टिप्पणी को आगे बढ़ा कर इस अभियान में शामिल हों. शुभकामनाऐं.

राजीव जैन Rajeev Jain said...

बहुत अच्‍छा लिखा
वैसे गिरधारी लालजी के बारे में सही लिखा आपने

बॉस जयपुर के रहने वाले हो क्‍या

वैसे अपन भी लिख चुके हैं एक बार गिरधारी लाल जी पर जरा देखें
http://shuruwat.blogspot.com/2007/10/blog-post_10.html

नीरज गोस्वामी said...

जयपुर वाले कहीं भी बस जायें रहते जयपुर वाले ही हैं..मैं अपने जैसे जिन लोगों से मिला हूँ सभी इस बात का दम भरते हैं...दुनिया में जहाँ भी गया मुझे जयपुर प्रेमी लोग मिले...क्या करें जयपुर है ही ऐसा. आप ने बहुत बढ़िया लिखा है पढ़ कर आनंद आया...लिखते रहें.
नीरज

miHir pandya said...

श्री उड़न तश्तरी जी, आप भूल गए शायद. हम सराय में हुई ब्लोगर्स मीट में मिल चुके हैं. और नया हिन्दी ब्लॉग भी ज़रूर शुरू होगा. आग ऐसे ही फैलती है.

@राजीव.
हाँ भाई ठेठ पुरानी बस्ती वाले! नाहरगढ़ रोड. जंगजीत महादेव के सामने. वैसे लंबे समय तक रहना नहीं हुआ कभी जयपुर में लेकिन आना जाना लगा ही रहता है. जयपुर के बहुत साथियों से दोस्ती है. कोशिश करूंगा वहाँ से और किस्से लाने की.

@ नीरज.
एक बात है नीरज. आपने जो बात कही वो हिन्दुस्तान के हर कस्बे पर लागू होती है. घर जहाँ हो वो याद आता है चाहे जयपुर हो चाहे बरेली या बनारस. और एक बात और, हिन्दुस्तानी विदेश में जाकर भी अपना देश नहीं भूल पाते. और यह हमेशा अच्छा ही नहीं होता. विदेशों में हिन्दुस्तानी समुदाय आज भी उस देश के लोगों से अलग-थलग रहने वाले समुदाय के रूप में जाना जाता है. हमें ये याद रखना चाहिए कि संस्कृतियाँ मिलने से समृद्ध होती हैं.

दिनेशराय द्विवेदी said...

खूब लिखा आप ने, और लिखते रहें।

डॉ दुर्गाप्रसाद अग्रवाल said...

आपके गद्य की रवानी दिलकश है, और उस पर आपकी पैनी नज़र. क्या बात है! लगातार लिखें तो कुछ बात बने.

miHir pandya said...

बात भी बनेगी दुर्गा बाबू. लेकिन मुझे ये पसंद है कि हमेशा बात बने ही ना. कभी बिगड़ भी जाए.. बिखर भी जाए.. मोती की लड़ की तरह... सुबह की गीली ओस की तरह... चर्च गेट के लोकल के स्टेशन पर लोगों की भीड़ की तरह!

मुझे चीजों का ना बन पाना, बिखर जाना पसंद है.

Anonymous said...

मिहिर बाबू

आपके प्रोफाइल से तो लगता है कि आपको हिंदी फिल्में भी पसंद हैं पर आपने अपने ब्लॉग पर साइड बार में जो नाम दिए हैं फिल्मों के उसमें एक भी हिंदी की नहीं है. कोई खास वजह इसकी ?